दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति प्रसन्नता की खोज में भटक रहा है. जन्म से मृत्यु तक उसके जो भी कर्म होते है, वे प्रसन्नता प्राप्ति के लिए ही होते है. लेकिन वास्तविकता में उसके जीवन में ख़ुशी का हिस्सा बहुत कम आता है. दुनिअभर के भौतिक संसाधन एकत्रित कर लेने के बाद भी उसे प्रसन्नता नही मिलती है. असीमित धन दौलत एकत्रित कर लेने के बाद भी उसे शांति नही मिलती है, तो प्रश्न उठता है कि जिस ख़ुशी को पाने के लिए हमारे सारे कर्म होते है, फिर भी हमें