दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति प्रसन्नता की खोज में भटक रहा है. जन्म से मृत्यु तक उसके जो भी कर्म होते है, वे प्रसन्नता प्राप्ति के लिए ही होते है. लेकिन वास्तविकता में उसके जीवन में ख़ुशी का हिस्सा बहुत कम आता है. दुनिअभर के भौतिक संसाधन एकत्रित कर लेने के बाद भी उसे प्रसन्नता नही मिलती है. असीमित धन दौलत एकत्रित कर लेने के बाद भी उसे शांति नही मिलती है, तो प्रश्न उठता है कि जिस ख़ुशी को पाने के लिए हमारे सारे कर्म होते है, फिर भी हमें अनंत पत्रिका
रविवार, 24 जुलाई 2011
सुख की खोज
दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति प्रसन्नता की खोज में भटक रहा है. जन्म से मृत्यु तक उसके जो भी कर्म होते है, वे प्रसन्नता प्राप्ति के लिए ही होते है. लेकिन वास्तविकता में उसके जीवन में ख़ुशी का हिस्सा बहुत कम आता है. दुनिअभर के भौतिक संसाधन एकत्रित कर लेने के बाद भी उसे प्रसन्नता नही मिलती है. असीमित धन दौलत एकत्रित कर लेने के बाद भी उसे शांति नही मिलती है, तो प्रश्न उठता है कि जिस ख़ुशी को पाने के लिए हमारे सारे कर्म होते है, फिर भी हमें सोमवार, 18 जुलाई 2011
पाप से मुक्ति
एक बार कुछ जिज्ञासु ओशो के पास सत्संग के लिए पहुंचें. बातचीत के दौरान एक ने प्रश्न किया, ' क्या दान-पुण्य, तीर्थाटन, पूजा-पाठ इत्यादि साधनों से किये गये बुरे कर्मों से मुक्ति मिल सकती है?'
शुक्रवार, 8 जुलाई 2011
प्यार का एहसास ही तो ज़िन्दगी है
प्यार हमें खुश रखता है. प्यार हमें स्वस्थ रखता है. प्यार हमें लम्बी उम्र देता है. कई तरह के रिसर्च के बाद भी ये बात सामने आई है की प्यार में अपार ताकत होती है. प्यार हमारे अन्दर रोगों से लड़ने की अपार शक्ति पैदा करता है. जब किसी रोगी को किसी के द्वारा उसे प्यार किये जाने का एहसास होता है तो उसके शारीर में इस तरह के रासायनिक बदलाव होतें है, जिसके चलते उसमें रोगों से लड़ने की क्षमता काफी बढ़ जाती है.
बुधवार, 6 जुलाई 2011
जब से शहर आया हूँ...
जब से शहर आया हूँ
हरी साड़ी में नही देखा धरती को
सीमेंट कंक्रीट में लिपटी है
जींस-पैंट में इठलाती नवयौवन हो जैसे
धानी चुनर में शर्माते,
बलखाते नही देखा धरती को
जब से शहर आया हूँ |
गाँव में ऊँचें पहाड़ से
दूर तलक हरे लिबास में दिखती वसुंधरा
शहर में आसमान का सीना चीरती इमारत से
हर ओर डामर की बेड़ियों में कैद
बेबस, दुखियारी देखा धरती को
हंसती-फूल बरसाती नही देखा धरती को
जब से शहर आया हूँ|
लेखक - लोकेन्द्र सिंह राजपूत
रविवार, 26 जून 2011
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
