मंगलवार, 31 मई 2011

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस
आज विश्व तम्बाकू निषेध दिवस है. हर साल इसके आयोजक, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), एक अलग विषय पर ध्यान केंद्रित करते है. 31 मई २०११ के लिए डब्ल्यूएचओ फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन तोबक्को कंट्रोल विषय को चुना है.


13 जनवरी 2011 को  विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 31 मई २०११ के लिए डब्ल्यूएचओ फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन तोबक्को कंट्रोल विषय को चुना है. ये विषय दुनिया के कुल 195 देशों में से 175 द्वारा हस्ताक्षरित है, जिनकी कुल जनसँख्या पृथ्वी की आबादी का 85 प्रतिशत है. इसके तहत, इसके सदस्य देशो को तम्बाकू उत्पादों पर अंकुश लगाने हेतु कड़े कदम उठाने होंगे.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्यों ने 1987 में ये दिवस दुनिया के लोगों में तम्बाकू के प्रति जागरूक करने के किये बनाया गया था. विश्व तम्बाकू निषेध दिवस का मुख्य उद्देश्य 24 घंटों तक किसी भी तम्बाकू उत्पाद का सेवन न करना के लिए प्रोत्साहित करना है. विश्व तम्बाकू निषेध दिवस को इसलिए बनाया गया ताकि पूरी दुनिया तम्बाकू सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों से अवगत हो सके. अकेले तम्बाकू के सेवन से दुनिया भर में लगभग 5.4 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है.

तंबाकू के इस्तेमाल दुनिया भर में मौत का प्रमुख कारण है. इस साल दुनिया भर में दस लाख से अधिक लोग दिल का दौरा, स्ट्रोक, कैंसर, फेफड़ों के रोग, या अन्य तंबाकू के इस्तेमाल से संबंधित बीमारियों से मर जाएँगे. और इसके अतिरिक्त, 600,000 से ज्यादा लोग केवल उनके संपर्क में रहने से कई बिमारियों से ग्रस्त हो जाएँगे. विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि 2030 तक तम्बाकू सेवन 6 लाख से ज्यादा लोगों कि मौत का कारण होगा. तम्बाकू बीसवीं सदी के लिए एक वैश्विक महामारी साबित हुआ है, जिससे 20 वीं सदी के दौरान 100 लाख लोगों कि मौत हो चुकी है और 21 वीं सदी के दौरान 1 अरब लोगों को मार सकता है.

भारत में विश्व तम्बाकू निषेध दिवस महान उत्साह के साथ विभिन्न तरीकों के साथ मनाया जाता है. विभिन्न स्वास्थ्य संगठनों, सरकारी और समूह इस पर शिविर का आयोजन कर लोगों को तम्बाकू के बुरे प्रभाव के बारे में अवगत कराते है.

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