रविवार, 26 जून 2011

जैविक खेती से सोना उगा रहीं प्रभावती

प्रभावती

आमतौर से सफल तरीके से खेती कर पाना महिलाओं के वश की बात नहीं मानी जाती। लेकिन एक ग्रामीण महिला ने इसे झूठा साबित कर दिखाया है। भले ही उनके पास आजीविका के लिए छोटी-सी जमीन है, लेकिन उनका विश्वास इतना अडिग है कि उसी जमीन से मेहनत और काबिलियत के भरोसे सोना उगा रही हैं।

गोरखपुर के दुधई गांव की जानी-मानी 55 वर्षीय महिला किसान प्रभावती ने लगभग 12 साल पहले गोरखपुर एनवायरनमेंट एक्शन ग्रुप के संपर्क में आने के बाद जैविक खेती की राह अपनाई। वह मिश्रित खेती का बहुत अच्छा उपयोग करती हैं। विविध किस्म की फसलें अपने छोटे से खेत में लगाती हैं। इससे उनके 11 सदस्यों वाले परिवार का खर्चा चलता है। साथ में कोई न कोई फसल साल भर पास के बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध होती रहती है। इस प्रयास से उन्होंने साबित कर दिया है कि खेती अब घाटे का सौदा नहीं रह गई है। अगर हौसले बुलंद हों, तो बंजर भूमि पर भी सोना उगाया जा सकता है।
प्रभावती 10 कट्ठे जमीन में बागवानी करती हैं। इसमें पालक, धनिया, हल्दी आदि की खेती होती है। जबकि एक बीघा जमीन में आलू, मेथी, सरसों उगाती हैं और मेड़ पर मूली और बाकला लगा देती हैं। बाकी के खेत में गेहूं उगाकर पूरे परिवार के लिए खाद्यान्न का इंतजाम करती हैं। इनकी खेती की सबसे खास बात है देसी तरीका। वे जैविक खाद में वर्मी कंपोस्ट, जैविक कीटनाशक, मटका खाद आदि खुद बनाती हैं। खाद व दवा के लिए गोमूत्र गांव से लाती हैं। कीड़ों से बचाव की दवा नीम, धतूरे, गोमूत्र आदि से बनाती हैं। इस तरह साल भर जैविक अनाज व पौष्टिक गुणों से भरपूर सब्जी व फल अपने परिवार के लिए उगा लेती हैं। बीज भी खुद ही तैयार करती हैं। जैविक खाद और फलदार वृक्षों से उन्हें अतिरिक्त मुनाफा हो जाता है। जबकि खेती से सालाना 40 से 50 हजार कमा लेती हैं। उनके छोटे से बाड़े में सौ से अधिक मुर्गियां हैं। वहीं तीन दुधारू पशु भी हैं, जिनका दूध बेचती हैं। प्रभावती देवी एक किसान पाठशाला में पढ़ाने भी लगी हैं। मिश्रित खेती के गुर और जैविक खाद बनाने के तौर तरीके उन्हें सिखाती हैं। क्षेत्र के दर्जनों किसान उनसे सीखकर मिश्रित खेती कर रहे हैं। उन्होंने छोटे से खेत में इतनी उपलब्धियां प्राप्त की हैं कि कई कृषि विशेषज्ञ व अन्य इसे देखने पहुंच रहे हैं।


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