बच्चे गीली मिट्टी की भांति कोमल होते है, जिसे आप मनचाहे ढांचे में ढाल सकते है. उनको आप जैसा सीखएंगे वो वैसा ही सीखेंगे. अक्सर माता पिता की शिकायत होती है की उनका बच्चा कोई भी काम ढंग से नही करता है.लेकिन वे शायद भूल जाते है, की बच्चे मनमौजी होते है.पुरे दिन धमाचौकड़ी में लगे रहते है, मगर काम की सुध नही होती. ऐसे में हर माँ बाप का फ़र्ज़ बनता है की वे अपने बच्चे को शुरू से ही जिम्मेदारी सौंपें या कुछ काम में लगायें.लेकिन इस बात को भी याद रखे की बच्चो से काम लेने व उन्हें कार्य सीखाने का भी एक तरीका होता है.
माता-पिता अक्सर बच्चो को ऐसे निर्देश देते है, जिसमे बच्चे समझ ही नही पाते है की उन्हें क्या करना है और किस तरह करना है? प्राय: माता-पिता बच्चो को कार्य सौंप देते है और जब वो कार्य पूरा हो जाता है, तो उनके कार्य में दोष निकालते है, इससे वे साबित करते है की उन्हें कार्य सौंपना फ़िज़ूल है. आपके इस व्यवहार से बच्चा हतोत्साहित होगा.वह आपके किसी भी काम में रूचि नही लेगा. इसलिए बच्चो से काम करने के बाद उनकी थोड़ी-सी तारीफ़ जरुर कर दे. इससे बच्चो में काम करने की भावना जाग्रत होती है और वे ज्यादा कार्य करने के लिए प्रेरित होते है. घरेलु कार्यों के प्रति बच्चो की रूचि बढ़ने और उनमे सहयोग की भावना बढ़ने के लिए रचनात्मक तरीके से बच्चो को कार्य सौंपना जरुरी है. बच्चो को ये एहसास होना चाहिए की यह घर उनका भी है और पारिवारिक जिम्मेदारी में उनकी भागीदारी भी जरुरी है. शुरू से ही बच्चो को ये अच्छी तरह से समझा देना चाहिए की वो जो भी कार्य कर रहे है, उसका कुछ न कुछ परिणाम जरुर निकलेगा. बच्चो के प्रति बड़ो का व्यवहार मैत्रीपूर्ण होना चाहिए. बड़ो को बच्चों को सहयोग तो देना चाहिए पर उनकी गलतियों को अपने सर पर नही लेना चाहिए, क्योंकि अपनी भूल से ही वो कुछ नया सीख पायेंगें.
माता-पिता अक्सर बच्चो को ऐसे निर्देश देते है, जिसमे बच्चे समझ ही नही पाते है की उन्हें क्या करना है और किस तरह करना है? प्राय: माता-पिता बच्चो को कार्य सौंप देते है और जब वो कार्य पूरा हो जाता है, तो उनके कार्य में दोष निकालते है, इससे वे साबित करते है की उन्हें कार्य सौंपना फ़िज़ूल है. आपके इस व्यवहार से बच्चा हतोत्साहित होगा.वह आपके किसी भी काम में रूचि नही लेगा. इसलिए बच्चो से काम करने के बाद उनकी थोड़ी-सी तारीफ़ जरुर कर दे. इससे बच्चो में काम करने की भावना जाग्रत होती है और वे ज्यादा कार्य करने के लिए प्रेरित होते है. घरेलु कार्यों के प्रति बच्चो की रूचि बढ़ने और उनमे सहयोग की भावना बढ़ने के लिए रचनात्मक तरीके से बच्चो को कार्य सौंपना जरुरी है. बच्चो को ये एहसास होना चाहिए की यह घर उनका भी है और पारिवारिक जिम्मेदारी में उनकी भागीदारी भी जरुरी है. शुरू से ही बच्चो को ये अच्छी तरह से समझा देना चाहिए की वो जो भी कार्य कर रहे है, उसका कुछ न कुछ परिणाम जरुर निकलेगा. बच्चो के प्रति बड़ो का व्यवहार मैत्रीपूर्ण होना चाहिए. बड़ो को बच्चों को सहयोग तो देना चाहिए पर उनकी गलतियों को अपने सर पर नही लेना चाहिए, क्योंकि अपनी भूल से ही वो कुछ नया सीख पायेंगें.
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