| भाविनी मिश्रा |
जब मन में कुछ पाने की ललक हो, तो उसे कोई भी बाधा रोक नहीं पाती। रास्ते में चाहे कितने भी तूफान आएं, हौसलों के आगे वे भी पस्त हो जाते हैं। इसी की जीती-जागती मिसाल हैं भाविनी मिश्रा। करीब दस साल पहले की बात है, जब भाविनी दूसरी लड़कियों की तरह कॉलेज जाती थीं और साथ ही डांस वर्क्स परफॉर्मिंग आर्ट्स एकेडमी में नृत्य का प्रशिक्षण लेती थीं। पर एक दिन अचानक जीवन में कुछ कर दिखाने का सपना देखने वाली इस लड़की की आंखों की रोशनी जाती रही। पर भाविनी ने हार नहीं मानी और तकदीर से लड़ने की ठान ली।
जब 29 वर्ष की उम्र में दिल्ली के श्रीराम सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स में उसका डांस शो हुआ, तो सबने दांतों तले अंगुलियां दबा लीं। यहां केवल एक नर्तकी नहीं, बल्कि एक महिला के साहस, संघर्ष और कुछ कर दिखाने की इच्छा दिखाई दी। वे आंखों में लेंस लगाती थी। एक दिन सुबह उठीं तो कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। वह अचानक रेटिनल डिटैचमेंट की शिकार हो गई थीं। जिसमें रेटिना अपनी जगह से अलग हो जाता है और व्यक्ति अंधेपन का शिकार हो जाता है। उनका सफल ऑपरेशन तो हुआ, पर डॉक्टर ने कह दिया कि वह अब डांस नहीं कर पाएंगी, क्योंकि ऐसा करने से उनकी आंखों को नुकसान पहुंच सकता है।
पिता भी इस घटना के बाद भाविनी को डांस के मंच पर देखना नहीं चाहते थे। पर मां का साथ और शुभचिंतकों की दुआओं से वह पुनः नृत्य के मंच पर वापस लौटीं। भाविनी ने प्रैक्टिस की शुरूआत की और कॉलेज आदि के इवेंट्स में हिस्सा लेना आरंभ किया। नृत्य ने उनके जीवन को नई दिशा दी। कला के प्रति अगाध समर्पण ही है कि आज भाविनी सफल डांसर हैं।
जब 29 वर्ष की उम्र में दिल्ली के श्रीराम सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स में उसका डांस शो हुआ, तो सबने दांतों तले अंगुलियां दबा लीं। यहां केवल एक नर्तकी नहीं, बल्कि एक महिला के साहस, संघर्ष और कुछ कर दिखाने की इच्छा दिखाई दी। वे आंखों में लेंस लगाती थी। एक दिन सुबह उठीं तो कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। वह अचानक रेटिनल डिटैचमेंट की शिकार हो गई थीं। जिसमें रेटिना अपनी जगह से अलग हो जाता है और व्यक्ति अंधेपन का शिकार हो जाता है। उनका सफल ऑपरेशन तो हुआ, पर डॉक्टर ने कह दिया कि वह अब डांस नहीं कर पाएंगी, क्योंकि ऐसा करने से उनकी आंखों को नुकसान पहुंच सकता है।
पिता भी इस घटना के बाद भाविनी को डांस के मंच पर देखना नहीं चाहते थे। पर मां का साथ और शुभचिंतकों की दुआओं से वह पुनः नृत्य के मंच पर वापस लौटीं। भाविनी ने प्रैक्टिस की शुरूआत की और कॉलेज आदि के इवेंट्स में हिस्सा लेना आरंभ किया। नृत्य ने उनके जीवन को नई दिशा दी। कला के प्रति अगाध समर्पण ही है कि आज भाविनी सफल डांसर हैं।
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